Middle East War 2026: दो ग्रहण, मंगल-राहु का अंगारक योग और मिडिल ईस्ट में महायुद्ध – क्या तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत?
- Bhavika Rajguru

- Mar 9
- 5 min read
इजराइल-ईरान-अमेरिका युद्ध का असली कारण क्या है? ज्योतिषीय गणना से चौंकाने वाला विश्लेषण
विशेष रिपोर्ट – पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु
साल 2026 की शुरुआत से ही पूरी दुनिया में एक असामान्य बेचैनी देखी जा रही है। मध्य-पूर्व यानी Middle East में इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। मिसाइल हमले, ड्रोन स्ट्राइक, साइबर अटैक और सैन्य गठबंधनों की सक्रियता ने इस क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है।
ईरान द्वारा दुबई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और थाड (THAAD) सिस्टम पर हमले, इजराइल के हवाई हमले और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने पूरे विश्व को हिला दिया है। यूएई, कतर और अन्य खाड़ी देशों की सक्रियता ने इस संघर्ष को और गंभीर बना दिया है।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक सवाल तेजी से उठ रहा है—
क्या यह युद्ध केवल राजनीतिक कारणों से हो रहा है या इसके पीछे कोई खगोलीय कारण भी है?
ज्योतिष के कई विशेषज्ञों का दावा है कि फरवरी और मार्च 2026 में लगे दो बड़े ग्रहण इस वैश्विक तनाव के पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार ग्रहों की वर्तमान स्थिति बेहद उग्र है और यही कारण है कि दुनिया में युद्ध जैसी स्थितियां बन रही हैं।

15 दिनों में दो ग्रहण – क्या यही है युद्ध का संकेत?
फरवरी और मार्च 2026 में दो महत्वपूर्ण ग्रहण लगे:
17 फरवरी 2026 – सूर्य ग्रहण
3 मार्च 2026 – पूर्ण चंद्र ग्रहण
ज्योतिष के अनुसार जब एक ही पक्ष या 15 दिनों के भीतर दो ग्रहण लगते हैं तो इसे बेहद अशुभ संकेत माना जाता है।
पुरानी ज्योतिषीय कहावत है:
“एक मास दो गहना, राजा मरे या सेना।”
अर्थात जब एक महीने के भीतर दो ग्रहण हों तो दुनिया में बड़े युद्ध, सत्ता परिवर्तन या भारी उथल-पुथल की संभावना बढ़ जाती है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि:
“17 फरवरी को सूर्य ग्रहण के समय वैश्विक तनाव चरम पर था और 3 मार्च को लगे चंद्र ग्रहण के बाद मिसाइल हमले और सैन्य टकराव तेजी से बढ़ गए।”
उनके अनुसार यह संयोग केवल संयोग नहीं बल्कि ग्रहों की उग्र स्थिति का संकेत है।
मिडिल ईस्ट में क्यों बढ़ रहा है तनाव?
मिडिल ईस्ट हमेशा से दुनिया का सबसे संवेदनशील क्षेत्र रहा है।
इसके प्रमुख कारण हैं:
तेल और गैस के विशाल भंडार
धार्मिक और राजनीतिक संघर्ष
वैश्विक महाशक्तियों की रणनीतिक रुचि
परमाणु हथियारों का खतरा
2026 में स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
हाल की घटनाओं में:
इजराइल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले
ईरान का जवाबी मिसाइल हमला
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई
खाड़ी देशों की भागीदारी
इन घटनाओं ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के डर में डाल दिया है।
मंगल और शनि का खतरनाक प्रभाव
ज्योतिष में मंगल को युद्ध, रक्त और सैन्य शक्ति का ग्रह माना जाता है।
जबकि शनि को विनाश, कर्मफल और कठोर न्याय का ग्रह माना जाता है।
2026 में मंगल का गोचर कुंभ राशि में हो रहा है जो शनि की राशि है।
जब मंगल और शनि एक-दूसरे के प्रभाव में आते हैं तो दुनिया में:
युद्ध
हिंसा
प्राकृतिक आपदाएं
राजनीतिक संकट
बढ़ सकते हैं।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
“मंगल और शनि का यह संबंध केवल सीमित संघर्ष नहीं बल्कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध का संकेत दे सकता है।”
मंगल-राहु का अंगारक योग
ज्योतिष में मंगल और राहु की युति को अत्यंत उग्र माना जाता है।
इसे अंगारक योग कहा जाता है।
यह योग अक्सर संकेत देता है:
युद्ध
विस्फोट
आतंकवादी घटनाएं
परमाणु खतरा
अचानक सैन्य कार्रवाई
2026 में कुंभ राशि में मंगल और राहु की युति बन रही है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
“अंगारक योग दुनिया में सैन्य तनाव और संघर्ष को बढ़ा सकता है। यही कारण है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति बन रही है।”
ग्रहण और युद्ध का ऐतिहासिक संबंध
इतिहास में कई बार देखा गया है कि ग्रहण के आसपास बड़े युद्ध हुए हैं।
प्रथम विश्व युद्ध
1914 में ग्रहण के आसपास ही प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ।
द्वितीय विश्व युद्ध
1939 में ग्रहण के समय ही द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ।
इसी कारण कई ज्योतिषी मानते हैं कि ग्रहण के समय वैश्विक ऊर्जा अस्थिर हो जाती है।
इजराइल की कुंडली क्या कहती है?
इजराइल की स्थापना 14 मई 1948 को हुई थी।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार:
कन्या लग्न
कर्क राशि
इजराइल की कुंडली में राहु की महादशा चल रही है।
राहु की यह स्थिति देश को:
आक्रामक
रणनीतिक
सैन्य रूप से सक्रिय
बना सकती है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
“इजराइल इस युद्ध में उन्नत हथियारों का इस्तेमाल करेगा और शुरुआती दौर में उसे बढ़त मिल सकती है।”
ईरान की कुंडली का विश्लेषण
ईरान की स्थापना 1 अप्रैल 1979 को मानी जाती है।
ज्योतिषीय दृष्टि से:
सिंह लग्न
वृषभ राशि
वर्तमान समय में ईरान की कुंडली में:
गुरु महादशा
राहु अंतरदशा
चल रही है।
यह संयोजन कई बार:
आर्थिक संकट
राजनीतिक अस्थिरता
आंतरिक विद्रोह
का कारण बन सकता है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
“ईरान की सैन्य शक्ति मजबूत है लेकिन जनता का असंतोष और आर्थिक संकट उसे कमजोर कर सकता है।”
क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन संभव है?
कुछ ज्योतिषीय विश्लेषण बताते हैं कि जून 2026 तक ईरान में राजनीतिक बदलाव संभव है।
ऐसी स्थिति में:
अली खामेनेई की सरकार पर संकट
आंतरिक विद्रोह
सत्ता परिवर्तन
हो सकता है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रजा पहलवी की वापसी भी संभव हो सकती है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं है।
लेकिन इसका प्रभाव भारत पर भी पड़ सकता है।
संभावित प्रभाव:
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
वैश्विक व्यापार में अस्थिरता
आर्थिक दबाव
हालांकि ज्योतिषीय दृष्टि से भारत की स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जा रही है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
“भारत की राशि धनु है और ग्रहण सिंह राशि में लगा है इसलिए भारत पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा।”
विक्रम संवत 2083 और युद्ध के संकेत
19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 शुरू हो रहा है।
इस वर्ष का नाम है रौद्र संवत्सर।
ज्योतिष में रौद्र का अर्थ है:
उग्रता
संघर्ष
विनाश
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
“रौद्र संवत्सर के कारण वैश्विक स्तर पर संघर्ष और अस्थिरता बढ़ सकती है।”
क्या तीसरे विश्व युद्ध का खतरा है?
दुनिया के कई विश्लेषक मानते हैं कि यदि यह संघर्ष बढ़ा तो तीसरे विश्व युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है।
इसके कारण:
परमाणु हथियार
वैश्विक सैन्य गठबंधन
आर्थिक युद्ध
लेकिन अभी भी कूटनीति के रास्ते खुले हैं।
यह युद्ध कब तक चल सकता है?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार:
मार्च 2026 – सबसे खतरनाक समय
अप्रैल 2026 – तनाव में कमी
जुलाई-अगस्त 2026 – स्थिति स्थिर हो सकती है
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
“मंगल के 2 अप्रैल के बाद राशि परिवर्तन से युद्ध की तीव्रता कम हो सकती है।”
2026 का समय दुनिया के लिए बेहद संवेदनशील है।
ग्रहों की स्थिति:
दो ग्रहण
मंगल-राहु अंगारक योग
मंगल-शनि प्रभाव
इन सभी ने मिलकर वैश्विक ऊर्जा को उग्र बना दिया है।
हालांकि ज्योतिष केवल संकेत देता है, अंतिम निर्णय विश्व नेताओं के हाथ में होता है।
यदि कूटनीति सफल रही तो यह संकट टल सकता है, लेकिन यदि टकराव बढ़ा तो यह इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक बन सकता है।
Disclaimer:यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित विश्लेषण है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है। वास्तविक घटनाएं राजनीतिक और मानवीय निर्णयों पर निर्भर करती हैं।



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