पुष्कर से उठी दिव्य ऊर्जा: 27 हजार करोड़ गायत्री मंत्र जप से बदल सकता है विश्व का वातावरण :
- Bhavika Rajguru

- 6 days ago
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पुष्कर में 27 हजार करोड़ गायत्री मंत्रों की गूँज
2000 पंडितों की साधना और विश्व शांति का संकल्प
कलयुग का पहला “शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ” – पुष्कर से उठी आध्यात्मिक ऊर्जा
पुष्कर में 27 हजार करोड़ गायत्री मंत्रों की गूँज: कलयुग का पहला "शतगायत्री पुरश्चरण महायज्ञ"

राजस्थान की पवित्र भूमि में स्थित पुष्कर सदियों से ऋषियों, तपस्वियों और देवताओं की साधना भूमि माना जाता है। आज भी यह स्थान आध्यात्मिक ऊर्जा का एक अद्भुत केंद्र है। राजस्थान की पवित्र धरा, तीर्थराज पुष्कर से एक ऐसी आध्यात्मिक तरंग उठ रही है जो पूरे विश्व को शांति और दिव्यता का संदेश दे रही है।
इसी दिव्य भूमि पर 8 मार्च 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक 43 दिनों का “200 कुंडीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ” आयोजित किया जा रहा है। गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ" कोई साधारण आयोजन नहीं, बल्कि कलयुग के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि विश्व शांति, पर्यावरण शुद्धि और मानव चेतना के उत्थान के लिए किया जा रहा एक विराट वैदिक अनुष्ठान है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार यह महायज्ञ ज्योतिष, वेद और पुराणों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पुष्कर तीर्थ स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश की दिव्य ऊर्जा से जुड़ा हुआ क्षेत्र माना गया है। साथ ही वेद-माता गायत्री की उत्पत्ति स्थली होने से यह महायज्ञ ज्योतिष, वेद और पुराणों के संगम से निर्मित एक ऐसा सुरक्षा कवच है, जो विश्व शांति, पर्यावरण शुद्धि और मानव चेतना के उत्थान के लिए अनिवार्य है।
इस महायज्ञ में
लगभग 2000 विद्वान पंडित
200 विशेष हवन कुंड
लगभग 27 हजार करोड़ गायत्री मंत्रों का जप
के साथ यह आयोजन विश्व शांति और मानव कल्याण के संकल्प के साथ संपन्न किया जा रहा है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि इतने विशाल स्तर पर गायत्री मंत्र जप से उत्पन्न होने वाली ध्वनि तरंगें केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि मानसिक और पर्यावरणीय ऊर्जा को भी शुद्ध करने की क्षमता रखती हैं।
पुष्कर – तीर्थराज की दिव्य महिमा
सनातन धर्म में पुष्कर को “तीर्थराज” कहा गया है।पौराणिक ग्रंथों में इस स्थान की महिमा अत्यंत विस्तृत रूप से वर्णित है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि पुष्कर केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि देवताओं और ऋषियों की तपोभूमि है जहाँ हजारों वर्षों से साधना होती रही है।
पद्म पुराण, स्कन्द पुराण, ब्रह्म पुराण और महाभारत जैसे ग्रंथों में पुष्कर की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है।
पद्म पुराण में पुष्कर की महिमा
श्लोक
पुष्करे स्नानमात्रेण सर्वपापैः प्रमुच्यते।ब्रह्मलोकं स गच्छेत् तु सत्यं सत्यं न संशयः॥
अर्थ
पुष्कर में स्नान करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर ब्रह्मलोक को प्राप्त करता है।
स्कन्द पुराण
त्रिषु लोकेषु विख्यातं तीर्थं पुष्करमुत्तमम्।यत्र स्नात्वा नरः पुण्यं ब्रह्मलोकं प्रयाति च॥
अर्थतीनों लोकों में प्रसिद्ध सर्वोत्तम तीर्थ पुष्कर है।
ब्रह्म पुराण
पुष्करं नाम तत् तीर्थं ब्रह्मणा निर्मितं पुरा।तत्र स्नानं च दानं च सर्वयज्ञफलप्रदम्॥
अर्थपुष्कर तीर्थ स्वयं भगवान ब्रह्मा द्वारा निर्मित है।
महाभारत – तीर्थयात्रा पर्व
पुष्करे स्नानमात्रेण अश्वमेधफलं लभेत्।तत्र दानं महापुण्यं सहस्रगुणमुच्यते॥
अर्थपुष्कर में स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।
पुष्कर की दिव्यता का एक और प्रसिद्ध श्लोक
पुष्करं परमं क्षेत्रं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरैः।पूजितं सर्वदेवैश्च सर्वसिद्धिप्रदायकम्॥
भावार्थ
पुष्कर वह दिव्य क्षेत्र है जिसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित सभी देवताओं ने पूजित किया है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार यह श्लोक स्पष्ट करता है कि पुष्कर केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि देवताओं की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है।
गायत्री मंत्र – वेदों का दिव्य प्रकाश
गायत्री मंत्र को वेदों की जननी कहा जाता है।
यह मंत्र ऋग्वेद (मंडल 3, सूक्त 62, मंत्र 10) में वर्णित है और इसके द्रष्टा ऋषि महर्षि विश्वामित्र हैं।
गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वःतत्सवितुर्वरेण्यंभर्गो देवस्य धीमहिधियो यो नः प्रचोदयात्॥
भावार्थ: हम उस परम तेजवान, पापविनाशक, देवस्वरूप सूर्य (सविता) का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार गायत्री मंत्र केवल एक मंत्र नहीं बल्कि मानव चेतना को दिव्यता की ओर ले जाने वाला ब्रह्मांडीय ध्वनि सूत्र है।
ऋषि विश्वामित्र की परंपरा में गायत्री मंत्र का रहस्य
परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित यह यज्ञ विश्वामित्र की उसी महान परंपरा को जीवंत कर रहा है। भाविका राजगुरु बताती हैं कि इस परंपरा में 6 मुख्य रहस्य छिपे हैं:
24 अक्षरों का विज्ञान: ये अक्षर शरीर की 24 मुख्य नाड़ियों और 24 दिव्य शक्तियों को जाग्रत करते हैं।
सविता देवता: यह मंत्र सूर्य के भौतिक स्वरूप नहीं, बल्कि उसके आध्यात्मिक तेज 'सविता' से जुड़ता है।
तीन लोकों का संतुलन: भूः, भुवः, स्वः के उच्चारण से भौतिक, प्राणिक और मानसिक जगत संतुलित होता है।
त्रिकाल संध्या: सूर्योदय, मध्याह्न और सूर्यास्त के समय किया गया जप सिद्धि प्रदायक है।
इसलिए इसे मानव चेतना को जागृत करने वाला मंत्र कहा गया है।
2 – सविता देवता का रहस्य
इस मंत्र के देवता सविता (सूर्य का आध्यात्मिक रूप) हैं।
इसलिए गायत्री मंत्र जप से:
आत्मबल बढ़ता है
चेतना जागृत होती है
ज्ञान का प्रकाश मिलता है
3 – तीन लोकों का संबंध
मंत्र की शुरुआत में तीन लोकों का स्मरण होता है
भूः – पृथ्वी लोक
भुवः – अंतरिक्ष लोक
स्वः – स्वर्ग लोक
4 – बुद्धि जागरण का मंत्र
“धियो यो नः प्रचोदयात्”
अर्थात हमारी बुद्धि को दिव्य मार्ग पर प्रेरित करे।
महायज्ञ की भव्यता: आँकड़ों में दिव्यता
इस "शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ" की भव्यता को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
अवधि: 43 दिन की अखंड साधना।
साधक: 2000 से अधिक वेद-पाठी विद्वान पंडित।
हवन कुंड: 200 विशेष निर्मित यज्ञ वेदियाँ।
संकल्प: 27 हजार करोड़ गायत्री मंत्रों की आहुति और जप।
गायत्री मंत्र और नवग्रह का गुप्त संबंध
वैदिक ज्योतिष के अनुसार गायत्री मंत्र के अक्षरों में नवग्रहों को संतुलित करने की शक्ति होती है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि गायत्री मंत्र को इसलिए सर्वग्रह शांति मंत्र कहा जाता है।
मंत्र शब्द | ग्रह |
ॐ | सूर्य |
भूः | मंगल |
भुवः | चंद्र |
स्वः | गुरु |
तत् | शनि |
सवितुः | सूर्य |
वरेण्यं | शुक्र |
भर्गो | मंगल |
देवस्य | गुरु |
धीमहि | बुध |
धियो | चंद्र |
यो | राहु |
नः | केतु |
प्रचोदयात् | सूर्य + गुरु |
नवग्रह शांति के लिए गायत्री मंत्र के 9 विशेष उपाय
1 सूर्य ग्रह उपाय ☀
समस्याआत्मविश्वास की कमी, सरकारी कार्यों में बाधा
उपाय
सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें
108 गायत्री मंत्र जप
तांबे के पात्र का उपयोग
रविवार को गेहूं और गुड़ दान
फलप्रतिष्ठा और नेतृत्व शक्ति बढ़ती है।
2 चंद्र ग्रह उपाय 🌙
समस्यामानसिक तनाव, चिंता
उपाय
सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाएं
चंद्रमा को देखकर 27 गायत्री मंत्र जप
दूध या चावल दान
फलमन शांत होता है।
3 मंगल ग्रह उपाय 🔥
समस्याक्रोध, दुर्घटना योग
उपाय
मंगलवार को हनुमान मंदिर जाएं
21 गायत्री मंत्र जप
लाल मसूर दान
4 बुध ग्रह उपाय 📿
समस्यापढ़ाई में ध्यान की कमी
उपाय
बुधवार को गणेश पूजा
51 गायत्री मंत्र जप
हरी मूंग दान
5 गुरु ग्रह उपाय 🪔
समस्याभाग्य कमजोर
उपाय
गुरुवार को पीली वस्तु दान
108 गायत्री मंत्र जप
केले के वृक्ष की पूजा
6 शुक्र ग्रह उपाय ✨
समस्यावैवाहिक जीवन में तनाव
उपाय
शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा
108 गायत्री मंत्र जप
सफेद मिठाई दान
7 शनि ग्रह उपाय 🪐
समस्यासाढ़ेसाती या बाधाएँ
उपाय
शनिवार को पीपल के नीचे दीपक
108 गायत्री मंत्र जप
काले तिल दान
8 राहु ग्रह उपाय 🌑
समस्याभ्रम, अचानक संकट
उपाय
शनिवार को 108 गायत्री मंत्र जप
नारियल दान
9 केतु ग्रह उपाय ☄
समस्यामानसिक अस्थिरता
उपाय
गणेश पूजा
108 गायत्री मंत्र जप
कंबल दान
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार यदि इन उपायों को श्रद्धा से किया जाए तो नवग्रह संतुलित होते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ
इस ऐतिहासिक आयोजन का संचालनपरम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
मुख्य विशेषताएँ
43 दिन का अनुष्ठान
200 हवन कुंड
2000 पंडितों द्वारा साधना
27 हजार करोड़ गायत्री मंत्र जप
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि यह महायज्ञ कलयुग के सबसे बड़े वैदिक जप अनुष्ठानों में से एक माना जा सकता है।
सामूहिक मंत्रोच्चार की आध्यात्मिक शक्ति
वैदिक परंपरा के अनुसार जब हजारों लोग एक साथ मंत्र जप करते हैं तो
ध्वनि तरंगें वातावरण को शुद्ध करती हैं
मानसिक शांति बढ़ती है
सकारात्मक ऊर्जा फैलती है
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि सामूहिक गायत्री मंत्र जप मानव चेतना को ऊर्जावान बनाने का अद्भुत माध्यम है।
त्रिकाल संध्या जप का महत्व
ऋषि विश्वामित्र की परंपरा में गायत्री मंत्र जप दिन में तीन बार बताया गया है
सूर्योदय
दोपहर
सूर्यास्त
इसे त्रिकाल संध्या कहा जाता है।
आध्यात्मिक सिद्धि का मार्ग
विश्वामित्र परंपरा के अनुसार यदि कोई साधक
नियमित जप करे
शुद्ध जीवन जीए
ध्यान और प्राणायाम करे
तो गायत्री मंत्र से आध्यात्मिक सिद्धि और आत्मज्ञान प्राप्त हो सकता है।
🚩 व्यक्तिगत गायत्री अनुष्ठान: विशेष संकल्प विधि
ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि किसी भी अनुष्ठान की सफलता उसके संकल्प में होती है।
1. पितृ दोष और आत्मबल के लिए (सूर्य प्रधान अनुष्ठान)
यदि आपकी कुंडली में सूर्य नीच का है या राहु से पीड़ित है:
अनुष्ठान: "गायत्री-आदित्य" अनुष्ठान।
विधि: तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें लाल चंदन और लाल फूल डालें। सूर्योदय के समय 'ॐ भूर्भुवः स्वः...' मंत्र का 3 माला जप करें।
विशेष: जप के समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
2. मानसिक शांति और विष योग के लिए (चंद्र प्रधान अनुष्ठान)
यदि मन अशांत रहता है या कुंडली में 'केमद्रुम' दोष है:
अनुष्ठान: "गायत्री-सोम" अनुष्ठान।
विधि: चांदी के पात्र में गंगाजल और कच्चा दूध मिलाकर सामने रखें। रात्रि में चंद्रमा की रोशनी में बैठकर गायत्री मंत्र का जप करें।
विशेष: जप के बाद उस जल को तुलसी में अर्पित न करके किसी सफेद फूल वाले पौधे में डालें।
3. ऋण मुक्ति और मंगल दोष के लिए (मंगल प्रधान अनुष्ठान)
यदि कर्ज बहुत बढ़ गया है या विवाह में अत्यधिक देरी हो रही है:
अनुष्ठान: "गायत्री-शक्ति" अनुष्ठान।
विधि: मूंगे की माला से गायत्री मंत्र का जप करें। जप के बाद हनुमान चालीसा का पाठ अनिवार्य है।
विशेष: लाल आसन का प्रयोग करें और अनुष्ठान के दौरान भूमि शयन (जमीन पर सोना) करें।
4. व्यापार वृद्धि और बुद्धिमत्ता के लिए (बुध प्रधान अनुष्ठान)
यदि व्यापार में घाटा हो रहा है या बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता:
अनुष्ठान: "गायत्री-शारदा" अनुष्ठान।
विधि: हरे रंग के ऊनी आसन पर बैठकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके जप करें। माँ गायत्री को दूर्वा (घास) अर्पित करें।
विशेष: भाविका राजगुरु के अनुसार, बुधवार से शुरू करके इसे 21 दिनों तक लगातार करें।
🔱 अनुष्ठान के कड़े नियम (Rules of Sadhana)
पुष्कर की ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु इस बात पर विशेष जोर देती हैं कि गायत्री एक 'उग्र' और 'सात्विक' शक्ति है, इसलिए नियमों का पालन अनिवार्य है:
शुद्धि: अनुष्ठान के दौरान सात्विक भोजन (बिना प्याज-लहसुन) ग्रहण करें।
समय: प्रतिदिन एक ही निश्चित समय पर जप करें। ब्रह्मा मुहूर्त (सुबह 4 से 6) सर्वोत्तम है।
दीपक: गाय के घी का अखंड दीपक (यदि संभव हो) या जप काल तक दीपक जलता रहे।
माला: रुद्राक्ष या चंदन की माला का प्रयोग करें।
🌟 भाविका राजगुरु का विशेष परामर्श
"यदि आप भारी संकट में हैं, तो गायत्री मंत्र के साथ 'श्री' बीज मंत्र जोड़कर जप करें (ॐ श्रीं भूर्भुवः स्वः...)। यह लक्ष्मी प्राप्ति और दरिद्रता नाश के लिए अचूक है।"
पुष्कर महायज्ञ (2026) के दौरान यदि आप घर बैठे भी इन उपायों को करते हैं, तो आपको उस विराट ऊर्जा क्षेत्र का लाभ निश्चित रूप से प्राप्त होगा।
पुष्कर में आयोजित यह 200 कुंडीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मानवता और विश्व शांति के लिए किया गया एक महान आध्यात्मिक संकल्प है।
27 हजार करोड़ मंत्रों की ध्वनि और 2000 पंडितों की साधना से उत्पन्न ऊर्जा पूरे विश्व में सकारात्मक संदेश फैलाएगी।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार यह आयोजन कलयुग के सबसे महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठानों में से एक माना जा सकता है।
इसीलिए ऋषि परंपरा में कहा गया है—
“न गायत्र्या परं मंत्रं”
अर्थातगायत्री मंत्र से श्रेष्ठ कोई मंत्र नहीं।


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