15 जून को साल की पहली सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति का महा-दुर्लभ संयोग, इन उपायों से चमकेगा करियर :
- Bhavika Rajguru

- Jun 12
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महासंयोग: वर्षों बाद अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में बन रहा है सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति का दुर्लभ योग।
विशेषज्ञ मत: पुष्कर की प्रसिद्ध लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के विशेष इनपुट्स और महा-उपाय।
खास परंपरा: मिथुन संक्रांति पर भूदेवी (सिलबट्टे) की अनूठी पूजा विधि और उसका महत्व।

सनातन धर्म ग्रंथों में अमावस्या और संक्रांति दोनों ही तिथियों को बेहद पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से कल्याणकारी माना गया है। लेकिन साल 2026 में एक ऐसा अद्भुत और महा-दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है, जो कई दशकों में एकाध बार ही देखने को मिलता है।
15 जून 2026 (सोमवार) को वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या पड़ रही है और इसी दिन सूर्य देव का राशि परिवर्तन यानी मिथुन संक्रांति भी है। सबसे विशेष बात यह है कि यह ज्येष्ठ महीने के अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की अमावस्या है। अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए इस पावन महीने में सोमवती अमावस्या और संक्रांति का एक साथ आना अपने आप में अद्वितीय है।
पुष्कर की प्रसिद्ध लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
"मिथुन संक्रांति के साथ ही सोमवती अमावस्या के दिन महा पुण्य काल के दौरान किया गया दान-पुण्य कभी निष्फल नहीं होता। इस समय जरूरतमंदों को अन्न, जल, वस्त्र और छाते का दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।"
आइए जानते हैं इस दिन का सही मुहूर्त, महत्व, सिलबट्टे की पूजा की अनूठी परंपरा और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाने वाले विशेष उपाय।
सोमवती अमावस्या 2026: तिथि और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार अमावस्या तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है:
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 14 जून 2026 को दोपहर 12:19 बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त: 15 जून 2026 को सुबह 08:23 बजे तक
स्नान-दान का सर्वश्रेष्ठ समय: चूँकि अमावस्या तिथि 15 जून की सुबह समाप्त हो रही है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार उदय तिथि में 15 जून 2026 की सुबह ही स्नान और दान का कार्य करना सबसे श्रेष्ठ और फलदायी रहेगा।
मिथुन संक्रांति 2026: सूर्य का महागोचर और शुभ मुहूर्त
15 जून 2026 को दोपहर 12:58 बजे सूर्य देव अपने मित्र ग्रह बुध की राशि 'मिथुन' में प्रवेश करेंगे। सूर्य के वृषभ राशि से मिथुन राशि में जाने की इस घटना को मिथुन संक्रांति कहा जाता है। इसी क्षण से पुण्य कार्यों का विशेष दौर शुरू हो जाएगा।
संक्रांति के शुभ काल:
पुण्य काल: दोपहर 12:59 बजे से शाम 07:20 बजे तक
महा पुण्य काल: दोपहर 12:59 बजे से दोपहर 03:19 बजे तक (इस दौरान की गई पूजा का अनंत गुना फल मिलता है)।
बने रहे हैं ये 2 अद्भुत शुभ योग:
इस दिन शाम 07:08 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग प्रभावी रहेंगे। इसके साथ ही दोपहर का अभिजीत मुहूर्त इस दिन की पवित्रता को कई गुना बढ़ा रहा है। इन शुभ योगों में की गई सूर्य उपासना और मंत्र जाप से हर मनोकामना पूरी होती है।
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, इस दिन का महत्व निम्नलिखित रूपों में देखा जाता है:
अक्षय पुण्य की प्राप्ति: इस दुर्लभ महासंयोग में किया गया जप, तप, ध्यान और दान सामान्य दिनों की तुलना में अनंत गुना फल प्रदान करता है।
पितृ दोष से मुक्ति: अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है। इस दिन तर्पण, पिंडदान या दान करने से पितृ तृप्त होते हैं और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
सुखी वैवाहिक जीवन (सौभाग्य): विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए इस दिन व्रत रखती हैं।
पीपल पूजा और परिक्रमा: इस दिन पीपल के पेड़ में कच्चा सूत लपेटकर 108 परिक्रमा करने का विधान है, क्योंकि पीपल में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास माना गया है।
मौन व्रत का फल: शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मौन रहकर तीर्थ गुरु पुष्कर सरोवर एवं पवित्र नदियों में स्नान करने से हजार गायों के दान के समान पुण्य मिलता है।
मिथुन संक्रांति: भूदेवी (सिलबट्टे) की पूजा और मासिक धर्म की अनूठी मान्यता
मिथुन संक्रांति को देश के अलग-अलग राज्यों में (विशेषकर ओडिशा में 'राजा पर्बा' के रूप में) बेहद अनोखे तरीके से मनाया जाता है। मौसम विज्ञान की दृष्टि से इस दिन के बाद से सौरमंडल में बड़ा बदलाव आता है और वर्षा ऋतु का आरंभ माना जाता है।
सिलबट्टे की पूजा क्यों और कैसे की जाती है?
यह पर्व मुख्य रूप से महिलाओं और प्रकृति (धरती माता) के उत्सव का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जिस प्रकार महिलाओं को हर महीने मासिक धर्म होता है, उसी प्रकार सृष्टि के आरंभ में धरती माता (भूदेवी) को भी शुरुआती 3 दिनों तक मासिक धर्म हुआ था। मासिक धर्म को ही संसार में मातृत्व और सृजन का कारक माना गया है।
ऐसी मान्यता है कि मिथुन संक्रांति से लेकर अगले 3-4 दिनों तक धरती माता विश्राम (मासिक धर्म) में रहती हैं। इसलिए घर में मौजूद सिलबट्टे को भूदेवी का रूप मानकर उसकी विशेष पूजा की जाती है:
पूजा विधि: सिलबट्टे को अच्छे से साफ करके दूध और गंगाजल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद उस पर सिंदूर, चंदन, हल्दी और फूल चढ़ाकर पूजा की जाती है।
नियम: आने वाले चार दिनों तक सिलबट्टे का प्रयोग मसाला पीसने या खाना बनाने में बिल्कुल नहीं किया जाता। धरती माता को चोट न पहुंचे, इसलिए इस दौरान कृषि कार्य (जैसे हल चलाना या खुदाई) भी वर्जित होते हैं।
उत्सव: महिलाएं इस दिन पूरा श्रृंगार करती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और बरगद के पेड़ पर झूला डालकर सखियों के साथ खुशियां मनाती हैं।
विशेष महा-उपाय (Special Upay): जो चमकाएंगे आपकी किस्मत
ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, इस महासंयोग पर यदि नीचे दिए गए विशेष उपाय किए जाएं, तो जीवन के तमाम दोष और परेशानियां दूर होती हैं:
1. करियर में तरक्की और सूर्य दोष निवारण के उपाय
सूर्य को ज्योतिष में आत्मबल, मान-सम्मान, स्वास्थ्य और करियर का कारक ग्रह माना गया है।
सूर्य अर्घ्य: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें गंगाजल, रोली (लाल चंदन), अक्षत (चावल), थोड़ा सा गुड़ और लाल रंग के फूल डालें। उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।
मंत्र और स्तोत्र पाठ: अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ या ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठ जाएं और 108 बार सूर्य मंत्र का जाप करें। साथ ही 'आदित्य हृदय स्तोत्र' और 'सूर्य चालीसा' का पाठ करें। इससे कार्यक्षेत्र की बाधाएं दूर होंगी और उच्च अधिकारियों से सहयोग मिलेगा।
2. भगवान शिव की कृपा और धन संकट दूर करने का उपाय
सोमवती अमावस्या के दिन सुबह स्नान के बाद किसी शिव मंदिर में जाएं। वहां भगवान भोलेनाथ को सवा किलो कच्चे चावल (साबुत) अर्पित करें और विधिवत पूजा-आरती करें।
पूजा संपन्न होने के बाद उस चावल को किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें। यह उपाय जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति दिलाता है और धन से जुड़ी मानसिक व आर्थिक परेशानियों को हमेशा के लिए दूर करता है।
3. संक्रांति पर महादान (इन वस्तुओं का दान करें)
इस दिन महा पुण्य काल के दौरान ठंडी और जीवनोपयोगी वस्तुओं का दान करना पितरों को तृप्त करता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। विशेष फलदायी दान की सूची:
अन्न, जल, छाता, वस्त्र, मिट्टी का घड़ा (पानी से भरा हुआ), गुड़, गेहूं, फल, चप्पल, शीतल पेय
4. विवाह सुख हेतु उपाय
सुखी दांपत्य जीवन और वैवाहिक अड़चनों को दूर करने के लिए इस दिन बरगद (वट) वृक्ष की पूजा करें और उसकी सात बार परिक्रमा करें।
5. राहु-केतु शांति उपाय
यदि कुंडली में राहु-केतु परेशान कर रहे हों, तो इस महासंयोग के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को नीले और काले रंग के वस्त्र दान करें।
6. धन प्राप्ति का अचूक उपाय
अमावस्या की रात 11 कौड़ियां लाल कपड़े में बांधकर मां लक्ष्मी के चरणों में रखें और उनकी पूजा करें। अगले दिन सुबह इन कौड़ियों को अपनी तिजोरी या धन स्थान पर स्थापित कर दें। बरकत हमेशा बनी रहेगी।
7. पितृ दोष निवारण उपाय
शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए पीपल की जड़ में काले तिल अर्पित करें। इससे पितृ दोष शांत होता है।
भाविका राजगुरु की विशेष भविष्यवाणी पुष्कर की प्रसिद्ध लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
"15 जून 2026 का दिन आध्यात्मिक जागरण, पितृ कृपा और सूर्य ऊर्जा का अद्भुत संगम है। जो साधक इस दिन पूरी श्रद्धा से स्नान, दान, तर्पण, सूर्य उपासना और शिव पूजन करेगा, उसके जीवन में रुके हुए कार्य तेजी से गति पकड़ेंगे, करियर में उन्नति की नई संभावनाएं बनेंगी, आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा।"
15 जून 2026 की सोमवती अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि अधिक मास, सोमवती अमावस्या, मिथुन संक्रांति, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और अभिजीत मुहूर्त का एक महा-दुर्लभ संगम है। यह दिन पितृ तर्पण, सूर्य साधना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए वर्ष के सबसे शक्तिशाली दिनों में से एक है। श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए ये उपाय आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
✍️ पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु
( लाल किताब एवं आध्यात्मिक परामर्श विशेषज्ञ)




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