इस साल होगी झमाझम बारिश या पड़ेगा सूखा? जानिए साल 2026 के मानसून को लेकर ज्योतिष की सबसे बड़ी भविष्यवाणी :
- Bhavika Rajguru

- Jun 12
- 6 min read
भारत में मानसून सिर्फ एक मौसम नहीं, बल्कि देश की धड़कन और अर्थव्यवस्था का आधार है। इस साल मौसम विभाग (IMD) सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश का पूर्वानुमान जता रहा है, जिससे किसानों और आम जनता के मन में चिंता की लकीरें हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस साल सूखा पड़ेगा या फिर बादल झूमकर बरसेंगे?
मौसम विज्ञान की अपनी गणनाएँ हैं, लेकिन हमारा प्राचीन भारतीय ज्योतिष शास्त्र ग्रहों और नक्षत्रों की चाल से प्रकृति के मिजाज को पहले ही भांप लेता है। साल 2026 के मानसून की सटीक और खगोलीय गणना को लेकर पुष्कर की प्रसिद्ध लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु ने एक बेहद चौंकाने वाला और विस्तृत ज्योतिषीय पूर्वानुमान साझा किया है।
आइए पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु से जानते हैं कि जून से लेकर सितंबर 2026 तक मानसून का मिजाज कैसा रहेगा और शनि-मंगल की चाल क्या रंग दिखाएगी।

🌟
22 जून से मानसून होगा महा-सक्रिय: सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश लाएगा मौसम में बड़ा बदलाव।
जून अंत से जुलाई तक मूसलाधार बारिश: देश के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश के योग।
अगस्त में ब्रेक, सितंबर में फिर झमाझम: अगस्त में उमस भरी गर्मी परेशान करेगी, तो सितंबर में जाते-जाते मानसून रिकॉर्ड तोड़ेगा।
🌌 ग्रहों की जुगलबंदी: कैसा है वर्षा का ज्योतिषीय योग?
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस वर्ष ग्रहों और नक्षत्रों का विशेष गोचर वर्षा के अनुकूल और असंतुलित दोनों रूपों को दर्शा रहा है।
"मई के उत्तरार्ध में मिथुन राशि में तीन जलीय शुभ ग्रहों—बृहस्पति, शुक्र और बुध की युति बनी थी, जिसके प्रभाव से इस साल 28 से 30 मई के आसपास मानसून ने केरल में समय पर दस्तक दे दी।" - ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु
शास्त्रों का नियम है कि यदि सूर्य के आगे शुभ और जलीय ग्रह हों, तो यह बेहतरीन वर्षा का संकेत होता है। मई के अंत में राहु, शनि और मंगल जैसे क्रूर ग्रह सूर्य के पीछे गोचर कर रहे थे, जिसे पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु वर्षा के लिए एक अत्यंत अनुकूल योग मानती हैं। इस गोचर के कारण उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में तेज धूल भरी आंधियों के बाद बादलों की आवाजाही शुरू होगी, बिजली कड़केगी और प्री-मानसून की बौछारें पड़ेंगी।
📅 जून 2026 में मौसम के तीन रंग: बड़े गोचरों का असर
साल 2026 का आधा सफर तय करते ही जून का महीना मौसम के लिहाज से बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। एक तरफ जहां नौतपा और सूरज की तपिश इंसानी सब्र का इम्तिहान लेगी, वहीं ग्रहों का बदलाव राहत भी लाएगा। पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु ने जून के तीन बड़े बदलावों को इस प्रकार रेखांकित किया है:
1. 15 जून: सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश
15 जून को सूर्य देव वृषभ से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहाँ बुध पहले से विराजमान हैं। पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, मिथुन राशि में सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग मौसम में स्थिरता लाएगा और नियमित बारिश के योग बनने शुरू हो जाएंगे।
2. 20 जून: मंगल का गोचर (आंधी-तूफान के संकेत)
ज्योतिष में एक प्रसिद्ध कहावत है—‘चलत अंगार के वृष्टि कारक’ अर्थात् जब भी मंगल अपनी चाल बदलता है, मौसम में उथल-पुथल होती है। पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि मंगल भूमि का कारक है, इसलिए इस दौरान तेज आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश होगी जो कुछ जगहों पर थोड़ा नुकसान (उत्पात) भी करा सकती है।
3. 22 जून: सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश (मानसून का असली धमाका)
ज्योतिष शास्त्र में बारिश की मुख्य गणना सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन से होती है। पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, 22 जून की रात को सूर्य देव आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जो कि वर्षा का पहला और मुख्य नक्षत्र माना जाता है। इस बार आर्द्रा प्रवेश के समय 'स्त्री-पुरुष योग' बन रहा है, साथ ही उस दिन सोमवार का शुभ संयोग है। यह स्थिति दर्शाती है कि जून के आखिरी 10 दिनों (21 से 30 जून) में मुंबई सहित महाराष्ट्र के तटीय इलाकों, गुजरात, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत में झमाझम और मूसलाधार बारिश होगी, जिससे नदी-नाले उफान पर आ जाएंगे।
🌧️ सावन में झूम के बरसेंगे बादल: जुलाई का पूर्वानुमान
जून के शानदार अंत के बाद जुलाई का महीना किसानों के लिए अमृत समान साबित होगा। पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार:
6 जुलाई को सूर्य का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश: सूर्य देव पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 15 दिनों तक यहीं रहेंगे। यहाँ भी 'स्त्री-पुरुष योग' बनने से देश के पश्चिमी तट और मध्य भारत में अत्यंत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) के प्रबल योग हैं।
सावन की शुरुआत: जुलाई के उत्तरार्ध में जैसे ही सावन का पवित्र महीना शुरू होगा, सूर्य के अगले नक्षत्र परिवर्तन के साथ बादल जमकर बरसेंगे।
राजा और मंत्री का प्रभाव: पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु कहती हैं कि इस वर्ष के राजा 'गुरु' (बृहस्पति) और मंत्री 'मंगल' हैं। गुरु अच्छी वर्षा के कारक हैं और मंगल आंधी के साथ तेज बारिश कराते हैं, इसलिए दोनों का मिलाजुला असर देश को अच्छी वर्षा देगा।
⏳ अगस्त में ब्रेक: शनि का वक्री होना और उमस वाली गर्मी
जहां जून और जुलाई में देश पानी से सराबोर रहेगा, वहीं अगस्त का महीना थोड़ा परेशान कर सकता है। पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, 26 जुलाई को न्याय के देवता शनि देव वक्री हो रहे हैं।
शनि के वक्री होने से वर्षा के संतुलन में असमानता आएगी। इसके साथ ही, अगस्त के मध्य में सूर्य का गोचर सिंह राशि में होगा, जहाँ वे बुध और केतु के साथ संबंध बनाएंगे। इस ज्योतिषीय स्थिति के कारण अगस्त में बारिश में काफी कमी आ सकती है। पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु का पूर्वानुमान है कि इस दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में हवा में नमी बढ़ेगी, जिससे लोगों को अत्यधिक उमस, चिपचिपी गर्मी और शुष्क मौसम का सामना करना पड़ेगा।
🌊 सितंबर में मूसलाधार वापसी और मानसून की विदाई
जो कसर अगस्त के महीने में रह जाएगी, उसकी भरपाई सितंबर का महीना सूद समेत पूरी कर देगा। पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु ने सितंबर को लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी की है।
18 सितंबर 2026 को मंगल ग्रह मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। कर्क एक पूर्ण जलीय राशि है और वहाँ देवगुरु बृहस्पति पहले से ही विराजमान हैं। पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, इस महा-जलीय योग के कारण सितंबर के उत्तरार्ध में मध्य भारत और अन्य हिस्सों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति या अत्यधिक मूसलाधार बारिश हो सकती है। विदाई के समय का यह हस्त नक्षत्र और ग्रहों का योग जाते-जाते मानसून की हर कमी को पूरा कर देगा।
📑 त्वरित संदर्भ: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बारिश के अचूक नियम
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु ने ज्योतिष ग्रंथों के आधार पर बारिश के कुछ बुनियादी नियम भी साझा किए हैं, जिन्हें देखकर आप खुद भी मौसम का अंदाजा लगा सकते हैं:
बुध-शुक्र-गुरु का योग: यदि बुध और शुक्र एक ही राशि में हों और उन पर गुरु की दृष्टि हो, तो शुभ और अच्छी वर्षा होती है। (लेकिन यदि इन पर शनि या मंगल की दृष्टि पड़ जाए, तो अतिवृष्टि या बाढ़ के हालात बनते हैं)।
चन्द्र मंडल का घेरा: यदि आकाश में चंद्रमा के चारों ओर एक घेरा (Halo) बन जाए और उत्तर दिशा से बिजली चमकने लगे, तो तत्काल भारी वर्षा का योग बनता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का नियम: यदि सूर्य देव पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करें और उस समय आसमान बादलों से घिरा हो, तो कई दिनों तक लगातार झड़ी (बारिश) लगी रहती है।
✍️ सूखा या झमाझम बारिश?
मौसम विभाग के 'कम बारिश' के अनुमान के उलट, पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु की ज्योतिषीय गणना यह साफ संकेत दे रही है कि इस साल देश में सूखा कतई नहीं पड़ेगा। हालांकि, ग्रहों के फेरबदल के कारण बारिश का वितरण थोड़ा असमान (Unbalanced) या खंडित जरूर रहेगा। जून-जुलाई में मूसलाधार बारिश होगी, अगस्त थोड़ा सूखा और उमस भरा रहेगा, और सितंबर में मानसून की विदाई बेहद धमाकेदार और भारी बारिश के साथ होगी। कुल मिलाकर, यह साल कृषि और खरीफ की फसलों के लिए अनुकूल साबित होने वाला है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: मौसम विभाग (IMD) 10% कम बारिश कह रहा है, तो क्या इस साल सूखा पड़ेगा?
उत्तर: पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, इस साल देश में सूखा बिल्कुल नहीं पड़ेगा। हालांकि ग्रहों के फेरबदल के कारण बारिश का वितरण थोड़ा असमान (Unbalanced) या खंडित रह सकता है, लेकिन कुल मिलाकर झमाझम बारिश होगी।
प्रश्न 2: ज्योतिष में मानसून की शुरुआत किस दिन से मानी जा रही है?
उत्तर: पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, 22 जून 2026 की रात को जब सूर्य देव वर्षा के पहले नक्षत्र 'आर्द्रा' में प्रवेश करेंगे, तब से देश भर में मानसून पूरी तरह सक्रिय और आक्रामक रूप लेगा।
प्रश्न 3: अगस्त के महीने में बारिश कम क्यों रहेगी?
उत्तर: पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि 26 जुलाई को शनि देव वक्री हो रहे हैं और अगस्त के मध्य में सूर्य का संबंध बुध-केतु से होगा। इस शुष्क योग के कारण अगस्त में बारिश कम होगी और उमस ज्यादा रहेगी।
प्रश्न 4: इस साल मानसून के राजा और मंत्री कौन हैं, और उनका क्या असर होगा?
उत्तर: पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, इस साल के राजा 'गुरु' और मंत्री 'मंगल' हैं। गुरु देव अच्छी और कल्याणकारी बारिश कराएंगे, जबकि मंगल देव आंधी-तूफान के साथ तेज बौछारें लाएंगे।
प्रश्न 5: ज्योतिष के अनुसार लगातार कई दिनों तक बारिश होने का योग कब बनता है?
उत्तर: पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, जब सूर्य देव पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और आसमान बादलों से घिर जाता है, तब कई दिनों तक लगातार झड़ी (बारिश) लगने का महायोग बनता है।




Comments