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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025: तंत्र, साधना और सिद्धियों का परम पर्व :

✍️ पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु द्वारा


नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की उपासना का महापर्व है, जो वर्ष में चार बार आता है—दो

सार्वजनिक (चैत्र और शारदीय) और दो गुप्त (माघ और आषाढ़)। इनमें से गुप्त नवरात्रि

तांत्रिक साधना, महाविद्या उपासना और रहस्यमयी शक्ति प्राप्ति का अत्यंत शुभ समय होता

है।

गुप्त नवरात्रि को तंत्र-सिद्धि, गुप्त साधना और आत्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

आइए विस्तार से जानें आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 की तिथियां, महत्व, देवी पूजन विधि, दस

महाविद्याओं की साधना और सिद्ध मंत्र—पुष्कर की प्रसिद्ध लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका

राजगुरु से।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 कब है?

ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, इस बार गुप्त नवरात्रि गुरुवार, 26 जून 2025 से प्रारंभ

होकर शुक्रवार, 4 जुलाई 2025 तक मनाई जाएगी। इसे गायत्री नवरात्रि भी कहा जाता है।


मुख्य तिथियां:

  • शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ: 25 जून 2025, सायं 4:00 बजे

  • शुक्ल प्रतिपदा समाप्त: 26 जून 2025, दोपहर 1:24 बजे

  • मिथुन लग्न: 26 जून 2025, प्रातः 5:25 बजे से 6:58 बजे तक

  • सर्वार्थ सिद्धि योग: 26 जून, 08:46 AM से 27 जून, 5:31 AM तक


गुप्त नवरात्रि का महत्व:

जैसा कि ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं, यह नवरात्रि खासकर तांत्रिकों, अघोरियों, और

साधकों के लिए अत्यंत फलदायक मानी जाती है। इन नौ रात्रियों में दस महाविद्याओं की

साधना कर साधक दुर्लभ आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करते हैं।

यह काल रोग, ऋण, शत्रु, भय, बाधाओं से मुक्ति और आत्मिक जागरण के लिए अत्यंत

उपयुक्त है। सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है।


गुप्त नवरात्रि पूजन विधि:

भाविका राजगुरु बताती हैं कि यदि आप तांत्रिक नहीं हैं, तब भी पारंपरिक पूजा विधि से आप

विशेष पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।


▪️ प्रारंभिक तैयारी:

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें

  • साफ लाल वस्त्र पहनें

  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं

  • देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें


▪️ कलश स्थापना:

  • मिट्टी के पात्र में जौ बोएं

  • कलश में गंगाजल भरें, आम की पत्तियां और नारियल रखें

  • कलावा बांधें और लाल कपड़े से ढकें


▪️ पूजन सामग्री:

  • लाल फूल, फल, रोली, चावल, घी का दीपक, अगरबत्ती

  • दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा, और नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें


▪️ विशेष अनुष्ठान:

  • प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा करें

  • नौ दिनों तक व्रत रखें

  • नवमी पर कन्या पूजन अवश्य करें


दस महाविद्याओं की विशेष साधना:

ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में माता की दस महाविद्याओं की साधना

अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।


महाविद्या स्वरूप मंत्र और साधना विधि :


1. मां काली :

स्वरूप : अज्ञान नाश, रात्रि साधना

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिण का‍लिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं

स्वाहा।

(लाल हकीक की माला से)


2. मां तारा :

स्वरूप : शत्रु नाश, सुरक्षा

ॐ ऐं ओं क्रीं क्रीं हूं फट्।

(स्फटिक माला से)


3. त्रिपुर सुंदरी (षोडशी) :

स्वरूप : सौंदर्य, प्रेम, इच्छापूर्ति

श्री ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं क्रीं कए इल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं

ह्रीं श्रीं नम:।


4. मां भुवनेश्वरी :

स्वरूप : वशीकरण, मोक्ष

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौ: भुवनेश्वर्ये नम: या ह्रीं।


5. मां छिन्नमस्ता :

स्वरूप : बलिदान, आत्म- बल

श्री ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरायनीये हूं हूं फट् स्वाहा।


6. त्रिपुर भैरवी :

स्वरूप : रोग मुक्ति, समृद्धि

ह स: हसकरी हसे।


7. मां धूमावती:

स्वरूप : कर्ज मुक्ति, शोक नाश

धूं धूं धूमावती ठ: ठ:।

(सुनसान स्थान पर साधना करें)


8. मां बगलामुखी :

स्वरूप : शत्रु वश, विवाद शमन

ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिव्हा

कीलय, बुद्धिं विनाश्य ह्लीं ॐ स्वाहा।


9. मां मातंगी :

स्वरूप : कला, संगीत, वशीकरण

श्री ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा।


10. मां कमला :

स्वरूप : (लक्ष्मी रूप) धन-वैभव, व्यापार

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।

(कमलगट्टे की माला से)


महत्वपूर्ण मंत्र (प्रतिदिन जप करें) –

ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु द्वारा सुझाए गए सिद्ध मंत्र:

1. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

2. ॐ नमः कालिकायै

3. ॐ दुर्गे देवि सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

4. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः

5. ॐ नमः शक्ति माते

6. ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा


⚠️ महत्वपूर्ण निर्देश:

भाविका राजगुरु की सलाह के अनुसार—

  • पूजा में तुलसी, दूब, आक, मदार का उपयोग वर्जित है।

  • मानसिक शुद्धता, संयम और मौन का पालन करें।

  • रात को जागरण और मां के बीज मंत्रों का जप करने से विशेष फल प्राप्त होता है।


समापन:

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 आत्म-जागरण, शत्रु नाश, धन-वृद्धि और सिद्धि का दुर्लभ योग

है। जैसा कि पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु कहती हैं—

“गुप्त नवरात्रि में साधक यदि श्रद्धा, नियम और एकाग्रता से साधना करें, तो उनके जीवन से

सभी अंधकार दूर हो सकते हैं, और दिव्यता का प्रकाश प्राप्त होता है।”

इस विशेष काल में देवी कृपा से संपूर्ण सिद्धि और सुरक्षा प्राप्त करें।


शुभ नवरात्रि!

यदि आप व्यक्तिगत उपाय, तांत्रिक साधना मार्गदर्शन या विशिष्ट मंत्रों की सिद्धि प्रक्रिया

जानना चाहते हैं, तो ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु से संपर्क करें।

 
 
 

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