गणेश चतुर्थी 2025 : कब है बप्पा का आगमन 26 या 27 अगस्त? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और स्थापना विधि :
- Bhavika Rajguru

- Aug 25, 2025
- 3 min read
✍️ पुष्कर की लाल किताब ज्योतिर्विद – भाविका राजगुरु
गणेश चतुर्थी का पर्व :
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि प्रदाता माना गया है। भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का महापर्व पूरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक सहित संपूर्ण भारत में यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है और गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठता है।
गणेश पुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। शास्त्रों में कहा गया है –“गणानां त्वा गणपतिं हवामहे” (ऋग्वेद)अर्थात् हम गणों के अधिपति गणेश की आराधना करते हैं।

गणेश चतुर्थी 2025 कब है – 26 या 27 अगस्त?
इस वर्ष गणेश चतुर्थी की तिथि को लेकर लोगों में उलझन है, क्योंकि चतुर्थी तिथि 26 और 27 अगस्त – दोनों दिन रहेगी।
🔹 पंचांग गणना के अनुसार –
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 26 अगस्त 2025, दोपहर 1:54 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 27 अगस्त 2025, दोपहर 3:44 बजे तक
👉 व्रत (उपवास) – 26 अगस्त को रखा जाएगा, क्योंकि उसी दिन रात्रि में चतुर्थी तिथि रहेगी।
👉 प्रतिमा स्थापना और पूजा – 27 अगस्त को की जाएगी, क्योंकि यह उदय तिथि में है और भगवान गणेश का जन्म भी दोपहर के समय माना जाता है।
📅 अतः गणेश चतुर्थी का मुख्य पर्व 27 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा।विसर्जन अनंत चतुर्दशी को, 6 सितंबर 2025 (शनिवार) को होगा।
गणेश चतुर्थी 2025 के शुभ मुहूर्त :
पुष्कर की लाल किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार –
मध्याह्न पूजन मुहूर्त: 27 अगस्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक
अन्य शुभ मुहूर्त:
प्रातः 7:33 से 9:09 (अमृत)
10:46 से 12:22 (शुभ)
सायं 6:48 से 8:15 (लाभ)
गणेश चतुर्थी 2025 में बनने वाले शुभ योग :
इस बार बप्पा के आगमन पर पांच विशेष शुभ योग बन रहे हैं, जो पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देंगे –
लक्ष्मी-नारायण योग – बुध और शुक्र की युति से बन रहा है, जो धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि का दाता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग – जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाने वाला।
रवि योग – आरोग्य और ऊर्जा प्रदान करने वाला।
शुभ योग – सभी कार्यों में मंगलकारी परिणाम देता है।
शुक्ल योग – मन को निर्मल बनाकर पुण्यफल प्रदान करता है।
🌟 इन योगों में बप्पा की पूजा करने से जीवन से सभी विघ्न दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि व सकारात्मक ऊर्जा आती है।
गणेश चतुर्थी का महत्व :
पुष्कर की लाल किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु बताती हैं कि –
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, अतः उनकी पूजा करने से सभी कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणपति की वंदना करने से वह कार्य सफल होता है।
गणेश चतुर्थी का 10 दिवसीय उत्सव परिवार, समाज और राष्ट्र को एकजुट करने का भी प्रतीक है।
गणेश प्रतिमा स्थापना विधि :
यदि आप इस बार पहली बार अपने घर बप्पा ला रहे हैं, तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें
1.मूर्ति चयन –
भगवान गणेश की सूंड बाईं ओर वाली मूर्ति लाना अत्यंत शुभ है।
बैठी हुई प्रतिमा लाएं, इससे घर में स्थिर सुख-समृद्धि आती है।
बप्पा का एक हाथ आशीर्वाद मुद्रा में और दूसरे हाथ में मोदक होना चाहिए।
स्थान चयन –
स्थापना ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में करें।
बप्पा का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
स्थापना प्रक्रिया –
लकड़ी की चौकी को गंगाजल से शुद्ध करें।
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर गणेशजी को विराजमान करें।
गणपति आवाहन मंत्र से प्रतिमा का पूजन आरंभ करें।
🌼 गणेश चतुर्थी पर आवश्यक पूजन सामग्री :
दूर्वा (21 जोड़े)
मोदक (लड्डू)
सिंदूर और लाल फूल
धूप, दीप और अगरबत्ती
लाल धागा और पीली सुपारी
पूजन विधि –
गणेश मंत्र, गणेश आरती और 21 दूर्वा दल अर्पित करें।
मोदक, लड्डू, गुड़ और फल का भोग लगाएं।
प्रतिदिन सुबह-शाम दीप प्रज्वलित कर आरती करें।
गणेश पूजा के समय ध्यान देने योग्य बातें :
✍️ पुष्कर की लाल किताब ज्योतिर्विद – भाविका राजगुरु के अनुसार, गणेश चतुर्थी या किसी भी शुभ अवसर पर गणपति जी की पूजा करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
पूजा में दूर्वा (घास), मोदक और लाल फूल अवश्य चढ़ाएँ।
गणेश जी को सिंदूर अर्पित करना बहुत शुभ माना गया है।
पूजा के समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
कम से कम 11 बार ऊपर बताए गए मंत्रों का जप करें।
संकल्प लेकर नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करें।
गणेश चतुर्थी 2025 इस बार 27 अगस्त से 6 सितंबर तक मनाई जाएगी।26 अगस्त को उपवास और 27 अगस्त को प्रतिमा स्थापना का महत्व है। इस बार पांच शुभ योग बनने से यह पर्व और भी मंगलकारी रहेगा।
🌸 पुष्कर की लाल किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक बप्पा की पूजा करेंगे, उनके जीवन से सभी विघ्न दूर होंगे और सुख-समृद्धि का आगमन होगा।
🙏 गणपति बप्पा मोरया! मंगल मूर्ति मोरया!




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