दर्श अमावस्या के दिन करें ये 5 उपाय, पितरों को मिलेगी शांति :
- Bhavika Rajguru

- Nov 25, 2024
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पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष महीने की दर्श अमावस्या तिथि 30 नवंबर को सुबह 10 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी और 1 दिसंबर को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि की मुताबिक दर्श अमावस्या 30 नवंबर दिन शनिवार को ही मनाई जाएगी. |

दर्श अमावस्या का महत्व :
दर्श अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, जिसे पितृ पक्ष से भी जोड़ा जाता है. यह दिन हमारे पूर्वजों यानी पितरों को समर्पित होता है. इस दिन पितृ देवता धरती पर आते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं. इस दिन पितरों की पूजा करना, तर्पण करना और पिंडदान करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो इस दिन विशेष पूजा करने से वह दोष दूर होता है. पितरों को शांत करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है. इस दिन किए गए दान और पूजा से पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के जीवन में आर्थिक उन्नति होती है.|
शनिवार के दिन पड़ने से इस अमावस्या को शनि अमावस्या कहा जाएगा.
इस दिन भगवान विष्णु, शिवजी, और माता गंगा की पूजा करने से विशेष फल मिलता है. अमावस्या तिथि पर किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है.इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करना भी शुभ होता है.|
मार्गशीर्ष अमावस्या शुभ मुहूर्त 2024 :
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त 05.08 मिनट से 06 .02 मिनट तक रहेगा.
इस दिन का अभिजीत मुहूर्त दिन में 11.49 मिनट से दोपहर 12.31 मिनट तक रहेगा.
इस दौरान आप स्नान और दान कर सकते हैं.|
मार्गशीर्ष अमावस्या पूजा विधि
1- स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
2- गणेश जी को प्रणाम करें
3- विष्णु जी का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
4- अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
5- मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
6- श्री विष्णु चालीसा का पाठ करें
7- पूरी श्रद्धा के साथ विष्णु जी की आरती करें
8- तुलसी दल सहित भोग लगाएं
9- अंत में क्षमा प्रार्थना करें
मार्गशीर्ष अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति :
अमावस्या के दिन अपने पितरों का ध्यान करते हुए पीपल के पेड़ पर थोड़ा गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल तथा पुष्प अर्पित करें,’ॐ पितृभ्य: नम:’ मंत्र का जाप करे. इस दिन पितृसूक्त और पितृस्तोत्र का पाठ करना शुभ फल प्रदान करता है.|
पितरों का तर्पण कैसे करें :
पितरों को तर्पण करने के लिए सबसे पहले अपने हाथ में कुशा लें. कुशा को लेने के बाद दोनों हाथ जोड़कर पितरों का स्मरण करें. पितरों का ध्यान करने के बाद उन्हें आमंत्रण देना चाहिए. उन्हें आमंत्रित करते हुए ‘ॐ आगच्छन्तु में पितर एवं गृह्णन्तु जलान्जलिम’इस मंत्र का जाप करना चाहिए.कुशा के साथ जल अर्पित करें.|

अमावस्या पर करें ये उपाय :
पितृ दोष निवारण के लिए पूजा :
पीपल के पेड़ को पितरों का वास माना जाता है. इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करके जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं. पितृदोष निवारण के लिए यंत्र की स्थापना कर पूजा करें और तिल के तेल का दीपक जलाकर पितरों का तर्पण करें. इस दिन मंत्रों का जाप करने से पितरों को शांति मिलती है.|
दान :
काले तिल का दान पितरों को शांति दिलाता है और गरीबों को अन्न का दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है. इसके साथ ही जरूरतमंदों को वस्त्र दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और गाय को चारा खिलाने से पितर प्रसन्न होते हैं.|
श्राद्ध कर्म :
पितरों के नाम से पिंडदान करना बहुत शुभ माना जाता है. दर्श अमावस्या के दिन विधिवत रूप से श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और लोगों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है|
पितरों का करें स्मरण :
दर्श अमावस्या के दिन पितरों को याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दें. पितरों के नाम से दान करते समय पूर्वजों के नाम का स्मरण करें.|
मंदिर में करें पूजा :
दर्श अमावस्या के मौके पर शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा करें और भगवान शिव से पितरों के आशीर्वाद की प्रार्थना करें. दर्श अमावस्या के दिन इन उपायों को करने से पितरों को शांति मिलेगी और आपका जीवन सुखमय होगा.|




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