धनतेरस 2024: महापर्व का महत्व और पूजा विधि :
- Bhavika Rajguru

- Oct 29, 2024
- 4 min read
दीपावली का पर्व हिंदू संस्कृति में 5 दिनों का महत्वपूर्ण उत्सव होता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है
और भाई दूज पर समाप्त होता है। धनतेरस हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर
मनाया जाता है। इस दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जनक भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी
और कुबेर देवता की पूजा की जाती है।

धनतेरस का असली ज्योतिषीय तथ्य :
धनतेरस का त्योहार केवल देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए नहीं, बल्कि भगवान यमराज
को श्रद्धांजलि देने के लिए भी मनाया जाता है। माना जाता है कि त्रयोदशी तिथि पर सोने की खरीदारी से
यमराज को प्रसन्न किया जा सकता है, जिससे भक्तों को अकाल मृत्यु का सामना नहीं करना पड़ता।
इसलिए, ज्योतिषी सलाह देते हैं कि घर के दरवाजे पर यमराज के नाम का दीप जलाया जाए, ताकि सुरक्षा
मिल सके।
धनतेरस का असली महत्व :
इस दिन लोग आभूषण और बर्तन खरीदने के लिए बाहर जाते हैं, ताकि अपने घरों में भाग्य और समृद्धि
ला सकें। यह त्योहार दीवाली से एक या दो दिन पहले मनाया जाता है।
कथा के अनुसार, धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन उनकी पूजा
की जाती है। एक अन्य कथा में, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया,
तब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए, जिन्होंने अमरत्व का रस लाया। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना
जाता है।
इस दिन माता लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है। भगवान धन्वंतरि के अमृत
कलश के साथ प्रकट होने के कारण इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा भी है।
धनतेरस की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त :
साल 2024 में धनतेरस को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग इसे 29 अक्टूबर को
मनाने की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ 30 अक्टूबर को इसे मनाने का दावा कर रहे हैं। सही जानकारी के
अनुसार, धनतेरस का पर्व 29 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर को गोधूलि काल में शाम 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 31
मिनट तक रहेगा। इस दिन धनतेरस की पूजा हमेशा प्रदोष काल में की जाती है, जिसमें भगवान धन्वंतरि
की पूजा के साथ दीपदान भी किया जाता है।
त्रिपुष्कर योग और धनतेरस :
इस बार धनतेरस पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जो सुबह 6 बजकर 31 मिनट से लेकर 10 बजकर 31 मिनट
तक रहेगा। इसके अलावा, सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक इंद्र योग और उसके बाद वैधृति योग बनेगा।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र शाम 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, उसके बाद हस्त नक्षत्र का आरंभ होगा।
धनतेरस खरीदारी का शुभ मुहूर्त :
धनतेरस पर खरीदारी का विशेष महत्व है। इस दिन शुभ मुहूर्त के दौरान की गई खरीदारी से सकारात्मक
फल की प्राप्ति होती है।
पहला खरीदारी का मुहूर्त:
धनतेरस के दिन त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जो सुबह 6:31 बजे से अगले दिन 10:31 बजे तक रहेगा। इस योग में की गई खरीदारी से वस्तुओं में तीन गुना वृद्धि होती है, इसलिए इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
दूसरा खरीदारी का मुहूर्त:
इस दिन अभिजीत मुहूर्त भी बन रहा है। 29 अक्टूबर को 11:42 बजे से लेकर 12:27 बजे के बीच खरीदारी
करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी।
भगवान धन्वंतरि की पूजा और खरीदारी के अन्य शुभ मुहूर्त:
सुबह 06:31 से 07:55 तक
सुबह 09:18 से 10:41 तक
दोपहर 1:27 से शाम 07:13 तक
रात 10:27 से 11:35 तक
इन मुहूर्तों का पालन करके आप धनतेरस पर शुभ और फलदायी खरीदारी कर सकते हैं।
धनतेरस पूजा विधि :
धनतेरस का पर्व धन और स्वास्थ्य की देवी-देवताओं की पूजा का विशेष दिन है। इस दिन भगवान
धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा विधि निम्नलिखित है:
1. स्नान और शुद्धता: धनतेरस के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। स्नान के बाद ध्यान करते हुए
अपने बाएं हाथ में जल भरकर खुद पर और अपने आसपास छिड़कें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥
2. चौकी स्थापित करें: उत्तर दिशा की तरफ एक चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। हर जगह
गंगाजल से छिड़काव करें।
3. प्रतिमा की स्थापना: कुबेर देव की प्रतिमा या मूर्ति को स्थापित करें। साथ ही भगवान गणेश, माता
लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की तस्वीरें भी रखें।
4. भगवान धन्वंतरि का आह्वान: भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र को साफ स्थान पर स्थापित करें।
फिर स्वयं पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। उनके आह्वान के लिए यह मंत्र पढ़ें:
सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं,
अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपम्,
धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।
5. अर्पण: पूजा के दौरान सभी देवी-देवताओं को मोली अर्पित करें। इसके बाद रोली, अक्षत, पान का पत्ता,
मिठाई, फल, फूल आदि चीजें अर्पित करें। कुबेर देव को अपनी श्रद्धा अनुसार सामग्री अर्पित करें।
एक चांदी का सिक्का और नारियल भी अवश्य अर्पित करें।
6. धन्वंतरि चालीसा: भगवान धन्वंतरि और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती
उतारें। पूजा के बाद प्रसाद को सभी में बांट दें।
7. रात्रि जागरण: धनतेरस की रात जागरण करें। शाम को मेन गेट और आंगन में दीपक जलाएं, क्योंकि
दीपावली के पर्व की शुरुआत होती है।
8. खीर का भोग: चांदी के बर्तन में खीर का भोग लगाएं (यदि चांदी का बर्तन न हो, तो किसी अन्य
बर्तन में भी भोग लगा सकते हैं)।
9. मुख शुद्धि: मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपारी अर्पित करें। शंखपुष्पी, तुलसी, ब्राह्मी जैसी पूजनीय
औषधियां भी भगवान धन्वंतरि को अर्पित करें।
10. रोग नाश की कामना: रोग नाश की कामना के लिए इस मंत्र का जाप करें:
ऊं रं रूद्र रोग नाशाय धनवंतर्ये फट्।।
11. प्रसाद: पूजा के अंत में कर्पूर आरती करें और फिर श्रीफल व दक्षिणा अर्पित करें।
धनतेरस की इस पूजा विधि के माध्यम से आप स्वास्थ्य, धन और समृद्धि की प्राप्ति कर सकते हैं।
धनतेरस का पर्व न केवल धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए है, बल्कि यह स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि
की भी कामना करता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की कृपा से सभी भक्तों के जीवन में आरोग्य और धन
का संचार होता है।
इस धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा करें और अपने जीवन में सुख,
समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त करें।




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