विकट संकष्टी चतुर्थी 2025: चतुर्थी और बुधवार का शुभ संयोग, चंद्रोदय परकरें पूजन, हर संकट होगा दूर :
- Bhavika Rajguru

- Apr 16, 2025
- 3 min read
विकट संकष्टी चतुर्थी 2025 की तिथि, महत्व और पूजा विधि :
विकट संकष्टी चतुर्थी वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है और इस बार यह शुभ पर्व बुधवार, 16 अप्रैल 2025 को आ रहा है। इस बार का संयोग खास है क्योंकि यह दिन बुधवार को पड़ रहा है, जो कि स्वयं बुद्धि के अधिपति भगवान गणेश और बुध ग्रह दोनों के लिए विशेष फलदायक माना जाता है।
✍️ पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिषाचार्य भाविका राजगुरु के अनुसार, इस बार संकष्टी चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, भद्रावास योग और शिववास योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन पूजा करने से घर में सुख- शांति, आर्थिक समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
⏰ शुभ मुहूर्त एवं पंचांग :
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल 2025, दोपहर 01:16 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 17 अप्रैल 2025, दोपहर 03:23 बजे
चंद्रोदय: रात 10:00 बजे
सूर्योदय: सुबह 05:55 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:48 बजे
ब्रह्म मुहूर्त: 04:26 AM – 05:10 AM
विजय मुहूर्त: 02:30 PM – 03:21 PM
गोधूलि मुहूर्त: 06:46 PM – 07:09 PM
निशिता मुहूर्त: 11:58 PM – 12:43 AM
विकट संकष्टी चतुर्थी का महत्व :
भविष्य पुराण के अनुसार, इस व्रत को रखने से जीवन के सभी दुख, रोग, विघ्न और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
इस दिन चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है और संतान सुख की प्राप्ति भी होती है।
यह दिन नए काम की शुरुआत, व्यवसाय में उन्नति, और परिवार में सौभाग्य के लिए अत्यंत उत्तम है।
चतुर्थी व्रत कैसे करें? (पूजा विधि) :
1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थान को साफ करके वहां लाल या पीले कपड़े पर गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। मूर्ति न हो
तो एक साबुत सुपारी को गणेश जी का रूप मानकर पूजन करें।
3. भगवान को पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) से स्नान कराएं और फिर शुद्ध जल चढ़ाएं।
4. गणेश जी को सिंदूर, अक्षत, चंदन, दूर्वा, जनेऊ, फूल, गुलाल अर्पित करें।
5. उन्हें मोदक व मौसमी फल का भोग लगाएं।
6. दिनभर व्रत रखें – संभव न हो तो फलाहार करें।
7. चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें और फिर गणेश जी की आरती करें।
8. अंत में व्रत का पारण करें।
विशेष उपाय: बुध ग्रह को करें प्रसन्न :
बुधवार + चतुर्थी के संयोग में निम्न उपाय करने से कुंडली के बुध दोष शांत होते हैं:
हरे मूंग का दान करें।
निम्न बुध मंत्र का जप करें (108 बार):
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः।
चतुर्थी पर करें इन मंत्रों का जाप (ज्योतिषाचार्य भाविका राजगुरु द्वारा अनुशंसित) :
गणेश मूल मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः।
विघ्न विनाशक मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
द्वादश नाम स्तोत्र:
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बकः।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजकः।।
धूम्रवर्णो भालचन्द्रो दशमस्तु विनायकः।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।
संपूर्ण स्तुति:
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय
लंबोदराय सकलाय जगद्धिताय।
नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।
अन्य उपयोगी मंत्र:
एकदंताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः।
प्रपन्न जनपालाय प्रणतार्ति विनाशिने।।
चंद्रोदय और अर्घ्य :
चंद्रोदय रात 10:00 बजे होगा। इस समय चंद्रमा को जल अर्पित करें और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें। इसके बाद व्रत का पारण करें।
विकट संकष्टी चतुर्थी 2025 का यह पर्व आपके जीवन की बाधाओं को हरने वाला, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करने वाला है। भगवान गणेश की भक्ति से आप हर संकट से मुक्त हो सकते हैं।
इस चतुर्थी, श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करें और अनुभव करें सुख, शांति और सफलता की ऊर्जा को।
शुभ विकट संकष्टी चतुर्थी! गणपति बप्पा मोरया!




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