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वैशाख माह 2025 - हिन्दू कैलेंडर में महत्व, मंत्र, धार्मिक अनुष्ठान और व्रत :

ज्योतिषाचार्य भाविका राजगुरु द्वारा

2025 का वैशाख माह, जो 13 अप्रैल से शुरू होकर 12 मई तक रहेगा, धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व रखता है। यह माह विशेष रूप से पूजा, व्रत, और दान के लिए आदर्श माना जाता है। इस महीने के दौरान वैशाख पूर्णिमा (12 मई) और वैशाख अमावस्या (27 अप्रैल) जैसे विशेष दिन होते हैं, जो गंगा स्नान, पूजा और पुण्य प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं। आइए पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु से जानते

हैं वैशाख माह के महत्व, इसके साथ जुड़ी धार्मिक अनुष्ठान विधियों, मंत्रों और व्रतों के बारे में।


वैशाख माह का महत्व :

भाविका राजगुरु ने बताया कि वैशाख मास को स्कंदपुराण में विशेष स्थान प्राप्त है और इसे सभी मासों में

श्रेष्ठ माना गया है। इस माह में भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। स्कंदपुराण के अनुसार, वैशाख

मास में सूर्योदय से पहले स्नान करने और व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस

माह में महीरथ नामक राजा ने वैशाख स्नान से बैकुंठ धाम की प्राप्ति की थी।

इस माह का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसे विशाखा नक्षत्र के नाम पर जाना जाता है, जो हिंदू

ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में से एक है। विशाखा नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं और देवता इंद्र माने जाते

हैं। इस महीने में किए गए दान से पुण्य का संचय होता है, जो जीवन के हर क्षेत्र में शुभ परिणाम लाता है।

इस माह का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान वैशाख स्नान, अक्षय तृतीया और गंगा सप्तमी हैं।


वैशाख माह के धार्मिक अनुष्ठान :

वैशाख माह में विशेष रूप से भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की पूजा की जाती है। इस माह में

परशुराम, नृसिंह, कूर्म और बुद्ध अवतार की पूजा की परंपरा है। यदि आप व्रत नहीं कर सकते तो व्रत

महात्म्य की कथा सुनना और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 11 बार जप करना शुभ माना जाता है।

साथ ही, इस माह में कम से कम एक बार भोजन करें और जरूरतमंदों को जल, फल, अन्न आदि का दान

करें। साथ ही गंगा स्नान या पुष्कर सरोवर में स्नान करने से जन्मों के संचित पापों से मुक्ति मिलती है |


वैशाख माह के मंत्र :

1. वैशाखे मेषगे भानौ प्रात: स्नानपरायण, अर्ध्य तेहं प्रदास्यामि गृहाण मधुसूदन।

2. ऊं नमो भगवते वासुदेवाय

3. ऊं नमो नारायण


इन मंत्रों का जाप प्रात: सूर्योदय से पूर्व करने से शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।


वैशाख माह के देवता :

वैशाख माह के देवता भगवान मधुसूदन, यानी भगवान कृष्ण माने जाते हैं। इस महीने में भगवान कृष्ण के

रूप में विशेष पूजा की जाती है।


वैशाख माह का शुक्ल और कृष्ण पक्ष :

  • कृष्ण पक्ष (13 अप्रैल से 27 अप्रैल): इस समय चन्द्रमा घटने की प्रक्रिया में होता है।

  • शुक्ल पक्ष (28 अप्रैल से 12 मई): इस समय चन्द्रमा का वर्धन होता है और इसे शुभ माना जाता है।

 
 
 

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