संकष्टीचौथ 2026: संतान की दीर्घायु और संकटों के नाश का महासंयोग! 🐘✨
- Bhavika Rajguru

- Jan 5
- 2 min read
🚩 जय माता दी! 🚩
माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी/तिल चौथ) इस वर्ष 6 जनवरी 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। मंगलवार का दिन होने के कारण इस बार यह "अंगारकी चतुर्थी" का दुर्लभ फल देने वाली है, जो हर प्रकार के संकटों को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
ज्योतिषाचार्या भाविका राजगुरु के अनुसार, संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए यह व्रत सर्वोत्तम है।

🗓️ संकष्टी चौथ 2026: शुभ मुहूर्त व योग :
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 6 जनवरी 2026, सुबह 08:01 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 7 जनवरी 2026, सुबह 06:52 बजे तक
चंद्रोदय का समय: रात 08:54 PM (स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर संभव)
विशेष शुभ योग:
अंगारकी चतुर्थी: मंगलवार को होने से मनोकामना पूर्ति का योग।
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 07:15 से दोपहर 12:17 तक (नए कार्य के लिए श्रेष्ठ)।
पूजा के चौघड़िया मुहूर्त:
लाभ - उन्नति: 11:09 AM से 12:27 PM
अमृत - सर्वोत्तम: 12:27 PM से 01:45 PM
शुभ - उत्तम: 03:03 PM से 04:21 PM
🌸 पूजा विधि और परंपरा :
व्रत संकल्प: सुबह स्नान के बाद लाल वस्त्र पहनें और संतान की रक्षा का संकल्प लें।
गणेश पूजन: शाम को भगवान गणेश को 21 दूर्वा, हल्दी, सिंदूर और लाल फूल अर्पित करें।
तिलकुट का भोग: सकट चौथ पर तिल और गुड़ से बना 'तिलकुट', शकरकंद और फलों का भोग अनिवार्य है।
चंद्र दर्शन व अर्घ्य: रात 08:54 बजे के बाद चंद्रमा को दूध, गंगाजल, अक्षत और सफेद तिल मिलाकर अर्घ्य दें। अर्घ्य के बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है।
🛠️ सटीक उपाय: अपने आने वाले कल को बेहतर बनाएँ :
संकष्टी चौथ पर भगवान गणेश को शमी पत्र और दूर्वा चढ़ाने से बुध और मंगल के दोष दूर होते हैं। अंगारकी चतुर्थी होने के कारण, यदि आप ऋण (कर्ज) या शत्रुओं से परेशान हैं, तो इस दिन गणेश जी के सामने घी का दीपक जलाकर "संकटनाशन गणेश स्तोत्र" का पाठ अवश्य करें।
याद रखें, सही विधि और श्रद्धा से किए गए उपाय आपके परिवार और संतान के जीवन से सभी विघ्नों को हर लेते हैं।
गणपति बप्पा मोरया! मंगल मूर्ति मोरया! 🙏🏻
भाविका राजगुरु
Rajguru AstroScience




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