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वरुथिनी एकादशी 2026: हर संकट से बचाएगा भगवान विष्णु का 'वरुथिनी' कवच; जानें शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और अचूक ज्योतिषीय उपाय :

लेखिका: भाविका राजगुरु (राजगुरु एस्ट्रोसाइंस)


वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'वरुथिनी एकादशी' के नाम से जाना जाता है, जो इस वर्ष 13 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। 'वरुथिनी' का अर्थ होता है 'रक्षा करने वाला' या 'कवच'। राजगुरु एस्ट्रोसाइंस की प्रमुख ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, यह एकादशी जातक के लिए एक आध्यात्मिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती है, जो न केवल शारीरिक कष्टों से रक्षा करती है बल्कि दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की शक्ति रखती है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस एक एकादशी का फल दस हजार वर्षों की कठिन तपस्या और कन्यादान के पुण्य से भी ऊपर माना गया है।

📅 वरुथिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त :

इस वर्ष एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 अप्रैल 2026 को मध्यरात्रि 01:16 AM बजे होगा और इसका समापन 13 अप्रैल को मध्यरात्रि 01:08 AM बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार व्रत 13 अप्रैल को ही रखा जाएगा। व्रत खोलने यानी पारण का सबसे शुभ समय 14 अप्रैल 2026 को सुबह 06:54 AM से 08:31 AM के बीच रहेगा। इस समय अंतराल में पारण करना व्रत का पूर्ण फल सुनिश्चित करता है।


📖 पौराणिक कथा: राजा मांधाता और वराह अवतार की कृपा :

वरुथिनी एकादशी की कथा अत्यंत प्रेरणादायक है। प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर परम तपस्वी राजा मांधाता राज्य करते थे। एक बार जब वे जंगल में गहरी तपस्या में लीन थे, तब एक जंगली भालू ने उनके पैर को चबाना शुरू कर दिया। असहनीय पीड़ा के बावजूद राजा विचलित नहीं हुए और मन ही मन भगवान विष्णु को पुकारते रहे। भगवान विष्णु ने प्रकट होकर अपने सुदर्शन चक्र से भालू का वध किया। राजा का पैर भालू खा चुका था, जिससे वे अत्यंत दुखी थे। तब भगवान ने उन्हें मथुरा जाकर वरुथिनी एकादशी का व्रत करने और उनके वराह अवतार की पूजा करने का आदेश दिया। श्रद्धापूर्वक व्रत करने के प्रभाव से राजा को पुनः सुंदर शरीर और अपना खोया हुआ पैर प्राप्त हो गया।


🛠️ पूजा विधि, सामग्री और खान-पान के नियम :

इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (या शालिग्राम जी) का पूजन पीले फूलों, चंदन, रोली और अक्षत से करना चाहिए। भगवान को तुलसी दल अर्पित करना अनिवार्य है, क्योंकि इसके बिना विष्णु पूजन अधूरा माना जाता है। पंचामृत से अभिषेक कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं। व्रत के दौरान अन्न, चावल, गेहूं, दालें और शहद का सेवन वर्जित है। फलाहार में आप साबूदाना, कुट्टू या राजगीरा का आटा, दूध, दही और मेवे ले सकते हैं। ध्यान रहे कि इस दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना और तामसिक वस्तुओं (प्याज, लहसुन) से दूरी बनाए रखना अनिवार्य है।


🛡️ राजगुरु एस्ट्रोसाइंस: वरुथिनी एकादशी के ५ अचूक उपाय :

ग्रहों के दोष दूर करने और अटके कार्यों को पूरा करने के लिए भाविका राजगुरु ये ५ विशेष उपाय सुझाती हैं:

  1. शारीरिक कष्ट मुक्ति हेतु: भगवान विष्णु के वराह स्वरूप के सामने 'गजेंद्र मोक्ष' का पाठ करें, इससे पुराने रोगों में लाभ मिलता है।

  2. आर्थिक समृद्धि के लिए: एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का दीपक जलाएं और ११ बार परिक्रमा करें।

  3. पितृ दोष शांति: इस दिन जल से भरा कलश, खरबूजा या तिल का दान करें; यह १०,००० वर्षों की तपस्या के समान पुण्य देता है।

  4. मानसिक शांति हेतु: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का १०८ बार जाप करें और श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

  5. सौभाग्य प्राप्ति: भगवान विष्णु को केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें और स्वयं के माथे पर केसर का तिलक लगाएं।


 वरुथिनी एकादशी 2026 आपके जीवन के समस्त पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करेगी। श्रद्धा और सही विधि के साथ किया गया यह व्रत आपके और आपके परिवार के लिए सुरक्षा कवच सिद्ध होगा।

🚩 बोलो लक्ष्मी-नारायण भगवान की जय!

व्यक्तिगत कुंडली विश्लेषण और परामर्श हेतु संपर्क करें: भाविका राजगुरु (राजगुरु एस्ट्रोसाइंस) |

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