पौष पुत्रदा (वैकुण्ठ) एकादशी 30 दिसंबर को बन रहा है विशेष संयोग, जानें संतान प्राप्ति के अचूक उपाय :
- Bhavika Rajguru

- Dec 27, 2025
- 5 min read
30 दिसंबर 2025 को पौष पुत्रदा एकादशी का पावन व्रत रखा जाएगा। इस दिन भरणी नक्षत्र, सिद्ध योग, रवि योग और भद्रावास योग जैसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो इसे संतान सुख और वैकुंठ प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी बनाते हैं।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, यह एकादशी न केवल संतान प्राप्ति बल्कि संतान के स्वस्थ, उज्ज्वल और दीर्घायु भविष्य के लिए भी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

पौष पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व :
सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। पौष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली इस एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है क्योंकि इसका मुख्य फल संतान प्राप्ति और संतान सुख से जुड़ा है।
धार्मिक मान्यता है कि—
इस व्रत को विधिपूर्वक करने से संतानहीन दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त होता है
संतान से जुड़ी बाधाएं, रोग, शिक्षा या विवाह की समस्याएं दूर होती हैं
घर में सुख-समृद्धि, शांति और वैभव बढ़ता है
जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है
भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी व्रत के महात्म्य का वर्णन करते हुए इसे मोक्षदायिनी बताया है।
Paush Putrada Ekadashi 2025 Date & Tithi :
वैदिक पंचांग के अनुसार —
एकादशी तिथि प्रारंभ:👉 30 दिसंबर 2025, सुबह 07:50 बजे
एकादशी तिथि समाप्त:👉 31 दिसंबर 2025, सुबह 05:00 बजे
👉 स्मार्त परंपरा के अनुसार व्रत: 30 दिसंबर 2025, पारण: 31 दिसंबर 2025👉 वैष्णव परंपरा के अनुसार व्रत: 31 दिसंबर 2025, पारण: 01 जनवरी 2026पौष पुत्रदा एकादशी 2025 – शुभ योग और विशेष संयोग
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार इस वर्ष यह एकादशी अत्यंत दुर्लभ योगों में आ रही है—
✨ सिद्ध योग
✨ शुभ योग
✨ रवि योग
✨ भद्रावास योग
🌟 भरणी नक्षत्र का विशेष प्रभाव
इन योगों में की गई पूजा, दान और मंत्र जाप कई गुना फल प्रदान करता है।
पौष पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि :
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार पूजा विधि—
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
पीले वस्त्र धारण करें
व्रत का संकल्प लें
भगवान विष्णु को
हल्दी, चंदन, केसर, पीले पुष्प अर्पित करें
दीप-धूप जलाएं
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
श्रीहरि की कथा सुनें/पढ़ें
आरती करें और प्रसाद वितरित करें
फलाहार करें (अन्न का सेवन न करें)
पुत्रदा एकादशी के दिन करें ये अचूक उपाय :
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, संतान की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए पौष पुत्रदा एकादशी अत्यंत चमत्कारी मानी जाती है। यदि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से कुछ विशेष उपाय किए जाएं, तो अगली पुत्रदा एकादशी तक संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होने की प्रबल संभावना बनती है।
1. लड्डू गोपाल की विशेष पूजा (संतान प्राप्ति हेतु सर्वोत्तम उपाय) :
पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा करें।
लड्डू गोपाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से स्नान कराएं
पंचोपचार विधि से पूजन करें
उनका प्रिय भोग (माखन, मिश्री, खीर या पंचामृत) अर्पित करें
इसके बाद संतान गोपाल मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें
ऐसा करने से भगवान श्रीकृष्ण शीघ्र प्रसन्न होते हैं और दंपत्ति को संतान सुख का वरदान प्राप्त होता है।
2. तुलसी में घी का दीपक जलाएं :
पौष पुत्रदा एकादशी के दिन स्नान के बाद तुलसी के पौधे में घी का दीपक जलाएं।
दीपक में रुई की बाती का प्रयोग करें
दीप जलाते समय भगवान विष्णु का स्मरण करें
धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
3. अन्न और वस्त्र का दान करें :
एकादशी के दिन अन्न, पीले वस्त्र या जरूरतमंदों को भोजन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार—
इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है
भगवान विष्णु की कृपा से संतान सुख प्राप्त होता है
संतान को दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है
4. ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करें :
पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा के समय—
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
साथ में विष्णु चालीसा और आरती भी पढ़ें
भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग अवश्य लगाएं
व्रत का पारण भी पंचामृत ग्रहण करके करें
इससे जीवन के सभी संकटों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
5. तुलसी में जल अर्पित करें :
पौष पुत्रदा एकादशी के दिन स्नान के बाद तुलसी में जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।
जल चढ़ाते समय भगवान विष्णु का स्मरण करें
विष्णु मंत्रों का जाप करें
इस उपाय से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल की वृद्धि होती है।
6. वैकुंठ एकादशी पर लक्ष्मी चालीसा का पाठ :
पौष पुत्रदा एकादशी को वैकुंठ एकादशी भी कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है।
इस दिन—
लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है
विष्णु मंदिरों में ‘स्वर्ग द्वार’ से दर्शन किए जाते हैं
भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं
संतान गोपाल मंत्र (अत्यंत प्रभावशाली मंत्र) :
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, संतान प्राप्ति हेतु इस मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है—
ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥
साथ ही नीचे दिए गए श्लोक भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य बाल स्वरूप और उनके जन्म-दृश्य की महिमा का वर्णन करते हैं—
शङ्खचक्रगदापद्मं धारयन्तं जनार्दनम् ।
अङ्के शयानं देवक्याः सूतिकामन्दिरे शुभे ॥
एवं रूपं सदा कृष्ण सुतार्थं भावयेत् सुधीः ।
शङ्खचक्रगदापद्मं दधानं सूतिकागृहे ॥
अङ्के शयानं देवक्याः कृष्णं वन्दे विमुक्तये ॥
इन छंदों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करने से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है और संतान संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
वैकुंठ एकादशी और पुत्रदा एकादशी का संबंध :
धर्मशास्त्रों में पौष पुत्रदा एकादशी को वैकुंठ एकादशी भी कहा गया है।
इस दिन—
विष्णु मंदिरों में स्वर्ग द्वार खुलते हैं
मोक्ष के द्वार खुलते हैं
पितरों को तर्पण करने से उन्हें मुक्ति मिलती है
गुरु बृहस्पति मजबूत होते हैं
विवेक बुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है
पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के लाभ :
पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार—
संतान सुख की प्राप्ति
संतान के जीवन की बाधाएं दूर
दुख-दरिद्रता का नाश
भाग्य में वृद्धि
वैभव और ऐश्वर्य
वाजपेय यज्ञ के समान फल
अंत समय में वैकुंठ प्राप्ति
Paush Putrada Ekadashi 2025 केवल एक व्रत नहीं, बल्कि संतान, सौभाग्य और मोक्ष का महापर्व है।30 दिसंबर 2025 को बन रहे दुर्लभ योग इस एकादशी को और भी विशेष बना रहे हैं।
पौष पुत्रदा एकादशी पर किए गए ये उपाय सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावशाली माने गए हैं।पुष्कर की लाल-किताब ज्योतिर्विद भाविका राजगुरु के अनुसार, यदि दंपत्ति श्रद्धा, संयम और विश्वास के साथ इन उपायों को करें, तो भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कृपा से संतान सुख अवश्य प्राप्त होता है। यदि आप संतान सुख, संतान के उज्ज्वल भविष्य या जीवन की बाधाओं से मुक्ति चाहते हैं, तो यह व्रत अवश्य करें।




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